Thursday, 10 October 2024

दया✍️

दया वह भाषा है जिसे गूंगे बोल सकते हैं और बहरे समझ सकते हैं।
 बचपन से लेकर बड़े होने तक हमें दया करना सिखाया जाता है हम किसी भी जाति या समुदाय के हो हमें सामाजिक जीवन जीना है,।इंसानियत की पहचान बनाए रखने के लिए दया एक आवश्यक भाव है।
 किसी व्यक्ति को देखकर उसकी गरीबी, लाचारी या बीमारी पर जब हमारा हृदय करुणा से भर जाता है,और हम उसकी सहायता करना चाहते हैं वही दया है 🥰
अगली बार जब किसी गुब्बारे वाले को, सब्जी बेचने वाले वृद्ध को, जूते सुधारने वाले मोची को या सड़कों पर मूंगफली का ठेला लगाने वाले को, बस और ट्रेन में कॉर्न बेचने वाले को देखें तो हम यह विचार करें कि कैसे हम उसी समय उनकी छोटी सी आमदनी को थोड़ा सहयोग देकर कुछ अतिरिक्त फायदा पहुंचा सकते हैं उनकी छोटी सी पूंजी में कुछ बढ़ोतरी कर सकते हैं।
 कैसे हमारा उन पर दया करना सार्थक हो सकता है? दया को मात्र पैसों की मदद के रूप में या भोजन या वस्त्र देकर परिभाषित करना ही नहीं है। हम,उन्हें कोई काम भी दिलवा सकते हैं, किसी चैरिटी देने वाली संस्था से मिलवा सकते हैं। सहानुभूति पूर्ण वचन बोले जा सकते हैं। यह सब दया को ही परिभाषित करता है।
 अमीर भी दया के आकांक्षी हो सकते हैं। यह संसार है और यहां सबको गुजरना पड़ता है। दूसरों पर दया करनी चाहिए और अपनी याद रखनी चाहिए। यहां जो कुछ भी हम देते हैं वही हमारे पास लौट कर आता है 👍
 हमें दया का सही-सही अर्थ और प्रयोग करना आना चाहिए चिड़िया सोचती है मछली को पानी में से उठाकर उसे तार पर सूखने के लिए टांग देना दया है🥺
 तुलसीदास जी कहते हैं दया धर्म का मूल है 🥰
हम थोड़ा सतर्क भी रह सकते हैं गलत या झूठे लोग हमारा फायदा ना उठा ले हमेशा अपनी सीमा पहचाने, ज्यादा अच्छा होगा कि नगद रुपए देने की अपेक्षा किसी चैरिटी देने वाली संस्था से भी उनका संपर्क करा सकते हैं।
 फिर एक नए विचार के साथ
 सुधा चौधरी (जैन )✍️🙏

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