स्मृतियों की चमक कभी फीकी नहीं पड़ती इन्हें कोई अपने से अलग क्यों कर दे और किस लिए कर दे।
एक शब्द है यादें जिसे हम दिन में एक न एक बार अवश्य प्रयोग कर लेते हैं। दुनिया में सब कुछ पुराना होता जाता है किंतु स्मृतियां हमारे मन में, मस्तिष्क में बसी रहती हैं । कुछ अच्छी होती हैं,कुछ बुरी होती हैं , कुछ प्रेरक होती हैं,कुछ दुखद होती हैं,कुछ सुखद होती हैं पर सदैव जीवित रहती हैं और जो प्रसंग बस हमें याद आ जाती हैं।किसी फिल्म की री ल की तरह एक-एक दृश्य, उस पूरे घटनाक्रम का हमारे मस्तिष्क पटल पर कोंध जाता है।पुरानी स्मृतियों का वर्तमान जीवन पर बहुत उपकार होता है। पुराने संघर्ष के दिन और उन दिनों की चुनौतियों को हमने किस तरह स्वीकार किया था और संघर्ष से परास्त किया था यह याद आते ही हम पुनः मजबूती से उठ खड़े होते हैं।
परिवार और दोस्तों के साथ बिताए गए यादगार पलों की याद आते ही मन संतोष और खुशियों से भर जाता है, एक नई ऊर्जा का संचार हमारे जीवन में होता है और हम उन संबंधियों से भावनात्मक जुड़ाव का पुनः आभास करने लगते हैं।
पुराने अनुभवों की वजह से हम बहुत सारी गलतियों को नहीं दोहराते
अपनी संस्कृति की धरोहर को जो हम यादों में जीवित रखते हैं, अपनी नई पीढ़ी तक इन्हीं स्मृतियों के माध्यम से पहुंचाते हैं❤️
रचनाकार, कलाकार, कथाकार, कवि पुरानी स्मृतियों के सहारे ही नये सृजन करते हैं।
नॉस्टैल्जिया एक मनोवैज्ञानिक शब्द है कि एक इंसान भूतकाल की अच्छी और सुखद यादों को कभी भूल नहीं पाता है। उन्हें याद करना ब्रेन में डोपामाइन और सेरोटोनिन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर को सक्रिय करता है जो संतुष्टि और खुशी के भाव को बढ़ावा देते हैं।
कई बार हम अतीत की दुखद स्मृतियों को भी नहीं भूल पाए किसी आत्मीय जन की मृत्यु या दोस्तों से बिछड़ना यह भी हमारी स्मृति में रह जाता है लेकिन यह एक तरह से अच्छा ही है इस क्षण की याद आने पर हमें उन लोगों के जीवन के अच्छे गुणों की याद आ जाती है जो बेहतर भी होता है।
कभी-कभी किसी भीषण दुर्घटना की याद भी हमारी यादों में रह जाती है यह भी बहुत अच्छा हो सकता है लेकिन तब, जब हमें यह ख्याल आ जाता है कि जीवन कितना क्षणभंगुर है क्यों ना हम इसे अच्छे तरीके से बिताएं 🥰
बचपन या किशोर अवस्था के वे शुरुआती गलतियों के दिन जो हमारे पूरे जीवन को खराब कर सकते थे उस समय की मार पिटाई और डांट -फटकार के दृश्य भी हमारी यादों से दूर नहीं जाते पर उस समय यही सोचना होगा कि मेरा आज का सुंदर जीवन उसी डांट फटकार की वजह से है। इसके लिए हम अपने बड़ों के प्रति कृतज्ञ हैं। पशु भी स्मृतियों का सहारा लेते हैं, मालिक की मौत पर कुत्ते का बहुत दिनों तक जो एहसास होता है उसे हम महसूस कर सकते हैं या गाय अपने मालिक को देखकर रंभाने लगती है। अनेक मांसाहारी और हिंसक पशु भी अपने मालिक से दोस्ताना संबंधों को अपनी स्मृति में कायम रखते हैं
यादों में कोई याद
बातों में कोई बात
ठहर जाए अगर स्मृति में तो
जीवन बन जाता है बहुत ही खास।
स्मृतियां हमारे जीवन के वह सहारे हैं जो हमें हर समय मददगार साबित होते हैं।
दूसरों के द्वारा, हमारे साथ किए गए दुर्व्यवहारों को भूलने की कोशिश करना चाहिए। बैर को भूलना ही मनुष्य का कर्तव्य है, क्योंकि वह भी हमारी यादों में रह जाता है।👍 "क्षमा वीरों का आभूषण है ' अच्छी यादों को संजोकर रखिए बस👍
सुधा चौधरी (जैन )
कल फिर एक नए विचार के साथ🙏✍️