Wednesday, 23 October 2024

करवा चौथ, ✍️

पति की लंबी आयु की कामना करने के लिए हमारे देश में करवा चौथ का व्रत सुहागन महिलाएं रखती हैं।फिल्मों मेंइसे बहुत ही खूबसूरत अंदाज में दिखाया जाता है।गीत फिल्माए जाते हैं।श्रृंगार से सजी स्त्रियां,मेहंदी से रचे हाथ -पैर, लाल साड़ी, जेवर,उपवास रखना इस व्रत के प्रति पूरा -पूरा समर्पण दिखाती हैं।पूरे दिन के उपवास के बाद चांद को चालनी से निहारते हुए, पति का चेहरा देखकर व्रत तोड़ा जाता है। यह पति पत्नी के बीच भावनात्मक और संवेदनात्मक आत्मीयता को बढ़ाने वाला कदम माना जाता है।
 इंस्टा, फेसबुक, वीडियो ने इस व्रत का मजाक बनाना शुरू कर दिया है। व्रत की गंभीरता को हास्य के रूप में दिखाया जाना सचमुच चिंताजनक है
 कहते हैं फिल्में समाज का आईना होती है अब फिल्मों की जगह सोशल मीडिया ने ले ली है तो क्या अब इसी तरह परिवार में पति और पत्नी की छवि होती है?यह विचार कि साड़ी और जेवर दिलाओ, यह विचारणीय प्रश्न है और वह भी धमकी के अंदाज में,,इस तरह के वीडियो वायरल करना हिंदी संस्कृति का मजाक उड़ाना है🥺 जब इस तरह के वीडियो बनाए जाते हैं तब मुख्य रूप से यह ध्यान रखा जाता है कि लोग हंसेऔर व्यूज एवं लाइक मिलें।
 व्रत का तो अपना महत्व है ही स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी और संयम के दृष्टिकोण से भी परंतु,इसके साथ-साथ एक और बात भी ध्यान रखना चाहिए कि तनाव रहित जीवन, स्वस्थ जीवन शैली,सात्विक खानपान, शांति और खुशहाली जो परिवार में बिखरी हो तो यह सब भी पति के जीवन को,उनको दीर्घायु बनाने में सहायक होते हैं।
🥰🙏हैप्पी करवा चौथ 
 सुधा चौधरी (जैन )
 धन्यवाद,
✍️ फिर किसी नए विचार के साथ

Thursday, 17 October 2024

संभावना✍️l

संभावना एक ऐसा शब्द है जो कि किसी काम के होने की आशावादिता को व्यक्त करता है🥰
1,बीज में वृक्ष बनने की संभावना। 
2,फूल में फल बनने की संभावना।
3,बच्चों में बड़ा कलाकार,अभिनेता,
 डॉक्टर, इंजीनियर,नेता या फिर वैज्ञानिक बनने की संभावना को कोई 
नकार नहीं सकता।
4, पानी की बूंद में बाढ़ को लाने की संभावना।
 5,दवाओं से रोग के ठीक होने की संभावना।
 जो घटना अभी घटी नहीं है उसके पूर्व अनुमान को संभावना कहते हैं हम कभी-कभी कहते हैं संभवत यह हो जाएगा कभी-कभी कहते हैं यह नहीं होगा।50% पॉसिबिलिटी है परिणाम के आने की। आधा हां- आधा ना।
 संभावना हमेशा छुपी हुई होती है हम अ नुमान के आधार पर ही काम करते हैं।
 दुनिया में जितनी भी कार्य हुए हैं, महान लोगों ने उनकी संभावनाओं पर विचार किया चाहे वह वैज्ञानिक हों,चाहे वह कवि हों,चाहे वह दार्शनिक हों चाहे वह चित्रकार हों।शुरुआत में सिर्फ एक कल्पना होती है,और जब हम उस कल्पना में रंग भरना शुरू करते हैं तो परिणाम आना शुरू हो जाते हैं। सकारात्मक संभावनाओं पर काम करने से ही यह दुनिया इतनी विकास को प्राप्त हो रही है और विकासशील है।
 सफलता मिलेगी या नहीं मिलेगी इस ऊहा-पोह को छोड़कर काम करना शुरू करें, हर गलती के बाद सफल होने की संभावना बढ़ती जाती है, इस सूत्र को जीवन में याद रखना बहुत आवश्यक है यदि हम आगे बढ़ना चाहते हैं तो👍 यदि बीज कभी सोच ले कि मेरे ऊपर इतना मिट्टी का बोझ --- मेरे अंकुर की इतनी छोटी सी ताकत और मुझे गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध जाना है, इस बीज के दो भाग होते हैं एक जो गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध जाता है और एक जो गुरुत्वाकर्षण की दिशा में जाता है, बीज के अंकुर ने प्रयास किया खुले आसमान को देखने का उसकी जड़ों ने प्रयास किया, अपनी पत्तियों के लिए। जड़ ने तो कभी भी अपनी पत्तियों को नहीं देखा फिर भी उनको परिपोषित करती रही क्योंकि संभावना थी जड़ों के द्वारा सोखे गए पानी और खाद् से पत्तियां,टहनियां फल,फूल बनने की। जड़ो ने सोच लिया था कि मेरा अस्तित्व तभी तक महत्वपूर्ण है जब तक पत्तियां हैं,जब तक फूल हैं,जब तक फल हैं।
 संभावना को सकारात्मक तरीके से समझें,जीवन में आगे बढ़े ✍️❤️
 सुधा चौधरी (जैन) फिर एक नए विचार के साथ, धन्यवाद🙏

Wednesday, 16 October 2024

'संकट,✍️

 कोई संकट तब तक संकट नहीं होता जब तक वह आपको संकट नहीं लगता। संकट का इंतजार मत कीजिए, यदि संकट आपका दरवाजा खटखटाए तो आप हिम्मत के साथ उसका सामना करें
 अभी संकट आया नहीं है और उसके आने से पहले ही हम उसकी चिंता और फिक्र में अपना अनमोल समय और शक्ति बर्बाद करने लगें तो हम मूर्ख ही माने जाएंगे🥺
 मान लिया संकट आ भी गया लेकिन वह कहता है कि सं+कट हूँ (में संकट हूं )लेकिन,कट जाऊंगा समय कट जाता है।
 संकट की सिर्फ कुछ घड़ियां होती हैं लेकिन जीवन में तो कई वर्ष होते हैं वर्षों की तुलना यदि घड़ियों से करें तो राहत की सांस ले सकते हैं।
 धैर्य से सामना करना है
 धैर्य से समय कटने की प्रतीक्षा करनी है
 धैर्य से कारणों की समीक्षा करनी है
 सुखद परिणाम भी धैर्य से ही मिलेगा
 हारने से पहले कभी हार नहीं माननी चाहिए🥰
 संकट तो कई प्रकार के होते हैं पारिवारिक संकट, आर्थिक संकट, राजनीतिक संकट, युद्ध के संकट, सामाजिक संकट,
 समय और हमारी सही सोचने की शक्ति
 हमें हर संकट से पार उतार सकती है🥰
 फिर एक नए विचार के साथ 
सुधा चौधरी (जैन )
 धन्यवाद🙏

Thursday, 10 October 2024

दया✍️

दया वह भाषा है जिसे गूंगे बोल सकते हैं और बहरे समझ सकते हैं।
 बचपन से लेकर बड़े होने तक हमें दया करना सिखाया जाता है हम किसी भी जाति या समुदाय के हो हमें सामाजिक जीवन जीना है,।इंसानियत की पहचान बनाए रखने के लिए दया एक आवश्यक भाव है।
 किसी व्यक्ति को देखकर उसकी गरीबी, लाचारी या बीमारी पर जब हमारा हृदय करुणा से भर जाता है,और हम उसकी सहायता करना चाहते हैं वही दया है 🥰
अगली बार जब किसी गुब्बारे वाले को, सब्जी बेचने वाले वृद्ध को, जूते सुधारने वाले मोची को या सड़कों पर मूंगफली का ठेला लगाने वाले को, बस और ट्रेन में कॉर्न बेचने वाले को देखें तो हम यह विचार करें कि कैसे हम उसी समय उनकी छोटी सी आमदनी को थोड़ा सहयोग देकर कुछ अतिरिक्त फायदा पहुंचा सकते हैं उनकी छोटी सी पूंजी में कुछ बढ़ोतरी कर सकते हैं।
 कैसे हमारा उन पर दया करना सार्थक हो सकता है? दया को मात्र पैसों की मदद के रूप में या भोजन या वस्त्र देकर परिभाषित करना ही नहीं है। हम,उन्हें कोई काम भी दिलवा सकते हैं, किसी चैरिटी देने वाली संस्था से मिलवा सकते हैं। सहानुभूति पूर्ण वचन बोले जा सकते हैं। यह सब दया को ही परिभाषित करता है।
 अमीर भी दया के आकांक्षी हो सकते हैं। यह संसार है और यहां सबको गुजरना पड़ता है। दूसरों पर दया करनी चाहिए और अपनी याद रखनी चाहिए। यहां जो कुछ भी हम देते हैं वही हमारे पास लौट कर आता है 👍
 हमें दया का सही-सही अर्थ और प्रयोग करना आना चाहिए चिड़िया सोचती है मछली को पानी में से उठाकर उसे तार पर सूखने के लिए टांग देना दया है🥺
 तुलसीदास जी कहते हैं दया धर्म का मूल है 🥰
हम थोड़ा सतर्क भी रह सकते हैं गलत या झूठे लोग हमारा फायदा ना उठा ले हमेशा अपनी सीमा पहचाने, ज्यादा अच्छा होगा कि नगद रुपए देने की अपेक्षा किसी चैरिटी देने वाली संस्था से भी उनका संपर्क करा सकते हैं।
 फिर एक नए विचार के साथ
 सुधा चौधरी (जैन )✍️🙏

Tuesday, 8 October 2024

स्मृतियां ✍️

स्मृतियों की चमक  कभी फीकी नहीं पड़ती 
इन्हें कोई अपने से अलग क्यों कर दे और किस लिए कर दे।
 एक शब्द है यादें जिसे हम दिन में एक न एक बार अवश्य प्रयोग कर लेते हैं। दुनिया में सब कुछ पुराना होता जाता है किंतु स्मृतियां हमारे मन में, मस्तिष्क में बसी रहती हैं । कुछ अच्छी होती हैं,कुछ बुरी होती हैं , कुछ प्रेरक होती हैं,कुछ दुखद होती हैं,कुछ सुखद होती हैं पर सदैव जीवित रहती हैं और जो प्रसंग बस हमें याद आ जाती हैं।किसी फिल्म की री ल की तरह एक-एक दृश्य, उस पूरे घटनाक्रम  का हमारे मस्तिष्क पटल पर कोंध जाता है।पुरानी स्मृतियों का वर्तमान जीवन पर बहुत उपकार होता है। पुराने संघर्ष के दिन और उन दिनों की चुनौतियों को हमने किस तरह स्वीकार किया था और संघर्ष से परास्त किया था यह याद आते ही हम पुनः मजबूती से उठ खड़े होते हैं।
 परिवार और दोस्तों के साथ बिताए गए यादगार पलों की याद आते ही मन संतोष और खुशियों से भर जाता है, एक नई ऊर्जा का संचार हमारे जीवन में होता है और हम उन संबंधियों से भावनात्मक जुड़ाव का पुनः आभास करने लगते हैं।
 पुराने अनुभवों की वजह से हम बहुत सारी गलतियों को नहीं दोहराते 
अपनी संस्कृति की धरोहर को जो हम यादों में जीवित रखते हैं, अपनी नई पीढ़ी तक इन्हीं स्मृतियों के माध्यम से पहुंचाते हैं❤️
 रचनाकार, कलाकार, कथाकार, कवि पुरानी स्मृतियों के सहारे ही नये सृजन करते हैं।
नॉस्टैल्जिया एक मनोवैज्ञानिक शब्द है कि एक इंसान भूतकाल की अच्छी और सुखद यादों को कभी भूल नहीं पाता है। उन्हें याद करना ब्रेन में डोपामाइन और सेरोटोनिन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर को सक्रिय करता है जो संतुष्टि और खुशी के भाव को बढ़ावा देते हैं।
 कई बार हम अतीत की दुखद स्मृतियों को भी नहीं भूल पाए किसी आत्मीय जन की मृत्यु या दोस्तों से बिछड़ना यह भी हमारी स्मृति में रह जाता है लेकिन यह एक तरह से अच्छा ही है इस क्षण की याद आने पर हमें उन लोगों के जीवन के अच्छे गुणों की याद आ जाती है जो बेहतर भी होता है।
 कभी-कभी किसी भीषण दुर्घटना की याद भी हमारी यादों में रह जाती है यह भी बहुत अच्छा हो सकता है लेकिन तब, जब हमें यह ख्याल आ जाता है कि जीवन कितना क्षणभंगुर है क्यों ना हम इसे अच्छे तरीके से बिताएं 🥰
 बचपन या किशोर अवस्था के वे शुरुआती गलतियों के दिन जो हमारे पूरे  जीवन को खराब कर सकते थे उस समय की मार पिटाई और डांट -फटकार के दृश्य  भी हमारी यादों से दूर नहीं जाते पर उस समय यही सोचना होगा कि मेरा आज का सुंदर जीवन उसी डांट फटकार की वजह से है। इसके लिए हम अपने बड़ों के प्रति कृतज्ञ हैं। पशु भी स्मृतियों का सहारा लेते हैं, मालिक की मौत पर कुत्ते का बहुत दिनों तक जो एहसास होता है उसे हम महसूस कर सकते हैं या गाय अपने मालिक को देखकर रंभाने लगती है। अनेक मांसाहारी और हिंसक पशु भी अपने मालिक से दोस्ताना संबंधों को अपनी स्मृति में कायम रखते हैं 
 यादों में कोई याद 
बातों में कोई बात 
ठहर जाए अगर स्मृति में तो 
जीवन बन जाता है बहुत ही खास।
 स्मृतियां हमारे जीवन के वह सहारे हैं जो हमें हर समय मददगार साबित होते हैं।
 दूसरों के द्वारा, हमारे साथ किए गए दुर्व्यवहारों को भूलने की कोशिश करना चाहिए। बैर को भूलना ही मनुष्य का कर्तव्य है, क्योंकि वह भी हमारी यादों में रह जाता है।👍 "क्षमा वीरों का आभूषण है ' अच्छी यादों को संजोकर रखिए बस👍
 सुधा चौधरी (जैन )
 कल फिर एक नए विचार के साथ🙏✍️

Saturday, 5 October 2024

मुस्कुराहट ✍️

इंसान का सबसे  कीमती और सुंदर आभूषण है मुस्कुराहट, जो सभी आभूषणों की कमी पूरी कर देता है।
 अकेले गहने आपको इतना आकर्षक और खूबसूरत नहीं दिखा सकते जितना उन गहनों के साथ-साथ आपकी एक प्यारी सी स्माइल, 😊। मुस्कुराहट का अर्थ है तनाव रहित चेहरा।हर समय, बात -बात पर कोई हंस नहीं सकता किंतु कुछ अवसरों को छोड़कर प्रति समय आप तनाव रहित रहकर,प्रसन्नचित रह सकते हैं।मुस्कान का व्यावहारिक जीवन में कितना महत्व है कि लोग अपनी बेटियों के नाम मुस्कान रख देते हैं।
 आपके चेहरे की प्यारी सी मुस्कुराहट आपके आसपास के लोगों और माहौल को काफी खुशनुमा बना देती है सब सहज रहते हैं।सकारात्मक ऊर्जा बिखरती रहती है,  यदि किसी को किसी बात पर सहमत करना हो तो हम बात मुस्कुरा कर ही करते हैं। यह एक ऐसी खूबसूरत अभिव्यक्ति है जो चेहरे परआभा, खूबसूरती,संतुष्टि, आकर्षण,स्नेह और मित्रता को व्यक्त करती है।  एंड्राॅफिन और सेराटोनिन  खुशी को बढ़ाने वाले हार्मोन और मूड को बेहतर बनाने वाले हार्मोन हैं उनके स्रावित होने से नकारात्मकता कम होती है।
 मुस्कुरा कर सहज रहने से हम अनेक प्रतिकूलताओं का हल हम स्वयं ढूंढ लेते हैं।
 मुस्कुराकर नए दिन का स्वागत करें।
 अपने लगाए गए पौधों को देखकर,उन पर आए हुए फूलों को देखकर होठों पर सहज मुस्कुराहट आ जाती है🥰
 बच्चों के स्कूल से आने पर या पति महोदय के ऑफिस से आने पर आपकी हल्की सी मुस्कुराहट परिवार में खुशी और ऊर्जा का संचार कर देती है। मेहमानों के आने पर मित्रों के आने पर या उनसे मिलते समय आपकी मुस्कुराहट ही उनके लिए उपहार होती है।
 शेक्सपियर कहते हैं कि हो सकता है कोई मुस्कुराये फिर भी दुष्ट हो अर्थात दूसरों का दिल दुखा कर या अंतर में द्वेष रखते हुए हम मुस्कुराए तो यह स्वयं को छलने जैसा है।
 मुस्कुराइए क्योंकि इसमें कोई पैसे खर्च नहीं होते.
 दुनिया की हर संस्कृति में इसे चेहरे को निखारने वाला माना गया है कविताओं और कहानियों में मुस्कुराहट को टर्निंग पॉइंट या बदलाव का प्रतीक माना जाता है,बिना कुछ कहे, बहुत कुछ कहने की यह कला है 'मुस्कुराहट,  जो हमें सौगात के रूप में मिली है।
 सुधा चौधरी (जैन )विदिशा 
कल फिर एक नए विचार के साथ आपके बीच धन्यवाद ✍️🥰

Friday, 4 October 2024

'अभ्यास एक जादू'✍️

 अभ्यास हमारे जीवन में जादू का काम करता है।
 यदि जादुई परिणाम चाहिए तो अभ्यास करिए, मनुष्य जन्म से लेकर जीवन के आखिरी दिनों तक किसी न किसी कार्य का अभ्यास करता रहता है और आगे बढ़ता है।  अभ्यास के लिए हमें किसी दूसरे पर बहुत कम आश्रित रहना पड़ता है क्योंकि हमने जो सीख लिया है उसी में निपुणता  हासिल करना चाहते हैं पारंगत होना चाहते है,और बार-बार उसी क्रिया को दोहराने के लिए किसी सहायक की आवश्यकता नहीं होती है सिर्फ उसमें से गलतियां ढूंढ कर उनको करेक्ट करवाने वाले की आवश्यकता होती है 🥰
 अभ्यास सदैव एक रचनात्मक या रचनात्मकता की दिशा में होना चाहिए धीरे-धीरे अभ्यास हमारी आदतों में शामिल हो जाता है फिर हमें उतनी मेहनत नहीं करनी पड़ती क्योंकि हम अभ्यास करते-करते बहुत सारी चीजों में होने वाली गलतियों से सीख चुके होते हैं हमारा आत्मविश्वास बढ़ जाता है जो जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आवश्यक है
 जब हम धैर्य के साथ अभ्यास करते हैं तो हमारे जीवन में एक गंभीरता और पर्सनालिटी में एक सौम्यता आ जाती है। करत -करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान।रसरी आवत जात ही सिल पर पड़त निशान, कवि ने इस बात को प्रत्यक्ष अनुभव किया है की रस्सी तक को पत्थर पर बार-बार घिसा जाता है तो पत्थर पर भी निशान पड़ जाते हैं।इस चीज को हम ऐसे भी समझ सकतेहैं, या यूँ भी समझा जा सकता है, जैसे एक माली को ऋतु पर फल आने का पूरा भरोसा होता है। इसी प्रकार धैर्य के साथ अभ्यास करने वाले को समय पर परिणाम और अच्छा परिणाम मिलने का पूरा भरोसा होता है।
 बच्चों को शुरू से ही अभ्यास पुस्तिकाएं उपलब्ध कराई जाती है जो निरंतर अभ्यास से शुरू होने वाली लिखावटका अभ्यास कराती है,जो उस बच्चे को
भविष्य में  लेखक, कवि,साहित्यकार बना सकती है या आज रंगों का अर्थ जिनके लिए ड्राइंग के पेज पर जलेबी या चील -कौवे उड़ाने जैसा है वह भविष्य के एम एफ हुसैन बन सकते हैं 👍अभ्यास से देखने,सुनने, और समझने की दृष्टि को आयाम मिलता है यदि गलत कार्यों में या अपनी ही नजरों में गिरने वाले कार्यों का हम अभ्यास करते हैं  अभ्यास को अभिशाप बनते देर नहीं लगती।  अभ्यास छोड़ देने से हमने जो कुछ भी सीखा है वह छूटने लगता है। अभ्यास को प्रसन्नचित होकर करें।उदास होकर अभ्यास करने से वैसे परिणाम नहीं मिलते जिनकी हम उम्मीद करते हैं। किसी भी कला में पारंगत होने के लिए 
अभ्यास पहली और आखिरी शर्त है।remember practice makes a man perfact 👍
 सुधा चौधरी( जैन)
 कल फिर एक नए विचार के साथ🙏

Wednesday, 2 October 2024

'पड़ोस '✍️

संसार में शायद कोई इतना धनवान नहीं जो पड़ोसियों के बिना काम चला ले।
 आपके आसपास कैसे भी लोग रहते हो कोई फर्क नहीं पड़ता, फर्क पड़ता है जब कोई नहीं रहता हो। पड़ोस का अर्थ है हर समय हम साथ साथ हैं सुख में दुख में दिन में रात में हम साथ साथ हैं।
 आईये आज से हम एक अच्छा पड़ोसी धर्म निभाने की शुरुआत करते हैं।--
 बेटियों के विवाह हो जाते हैं, बेटे अलग रहने चले जाते हैं परंतु पड़ोसी एक लंबे अरसे तक हमारे बीच होते हैं। उनके घर महकने वाला अगरबत्ती की सुगंध या मिठाई की महक बिना इजाजत हमारे घर चली आती है, उनके बच्चे की गेंद को हमारे घर में आने से कोई रोक नहीं सकता चाहे वह खिड़की का कांच तोड़कर ही क्यों ना आई हो और उसके पीछे आने वाला उनका मासूम सा बच्चा जिसके हाथ तो घंटी तक नहीं पहुंचते जो सीधा ड्राइंग रूम में आ जाता है।है  आंटी जी आपके घर में हमारे बॉल आ गई है मैं ढूंढ लूं क्या? ❤️। मैं कुछ जवाब दूं उसके पहले ही वह गेंद को ढूंढना शुरू कर देता है। मैं उसे कैसे कहूं कि तुम्हारे गेंद के आने की खबर तो खिड़की के रास्ते से पहले आ चुकी है तुम अपनी गेंद ढूंढ लो और हमारा खोया हुआ बचपन भी ढूंढ कर दे दो जब उनके घर में मंगल कार्य होते हैं तो ढोलक की थाप हमारे घर मैं भी प्रवेश कर जाती है. हमारे घर की दीवारें भी गुनगुनाने लगती हैं और हम भी इंद्रधनुषी परिधानों में सज जाते हैं।हम इतने बड़े क्यों हो जाते हैं, और जाने कब हो जाते हैं कि खूबसूरत से जीवन में इस मासूमियत की इंपोर्टेंस को भूलते जाते हैं। मेरे यहां गूंजने वाले धार्मिक पाठ ,मंत्र  उच्चारण वहां पहुंचकर उनके घर के वातावरण को भी निर्मल बनाते होंगे।
 हवा बारिश धूप सब एक जैसी है तो फिर हम भी पड़ोस और पड़ोसियों के प्रति इस तरह क्यों नहीं रह सकते? पड़ोसी धर्म निभा सकते हैं।
  शब्द है पड़ोसी धर्म- जब धर्म शब्द कहीं जुड़ जाता है तो वहां पर आध्यात्मिकता शामिल हो जाती है पड़ोसियों के साथ सद्भावना रखते हुए समय- समय पर उनके काम आते हुए उनके सम्मान को और अपने सम्मान को कायम रखें🥰
 सुधा चौधरी (जैन )
 कल फिर एक नए विचार के साथ आपके बीच, नमस्कार, धन्यवाद🙏

Tuesday, 1 October 2024

"उपलब्धि, "

जीवन में आप क्या हासिल करना चाहते हैं यह कायनात भी आपको वही देने के लिए तैयार रहती है।
 कहते हैं ईश्वर उन्ही की मदद करते हैं जो अपनी मदद स्वयं करते हैं,आगे 
बढ़िये और ले लीजिए सब कुछ यहीं है।
 उदाहरण- मान लीजिए बहुत सारे लोग वन जाने का निर्णय करते हैं  हम देखते हैं सबका लक्ष्य वही है, वन जाने का,सबके काम करने का तरीका अलग होगा क्योंकि सबका लक्ष्य अलग-अलग है।
1- ज्ञानी वहां ध्यान लगाएंगे।
2- कोई चित्रकार वहां चित्र बनाएगा।
3- संगीतकार सुनना चाहता है झरने का संगीत और चिड़ियों का कलरव।
4- लकड़हारा वहां लकड़िया इकट्ठी करेगा।
5- ग्वाले को अपनी गाय चराना है और शिकारी को शिकार ढूंढना है।
6- प्यासा पानी ढूंढेगा और भूखा फल ढूढ़े गा।
7- कोई बन -औषधि ढूंढेगा।
8- फोटोग्राफर एक सुंदर सा चित्र कैमरे से  निकाल लेगा।
 9-कवि वहां बैठकर काव्य रचना भी कर सकते हैं।
 निष्कर्ष -
 इस तरह हम समझ सकते हैं कि, कुदरत हमें वही दे देती है जो हम चाहते हैं।जीवन में लक्ष्य का निर्धारण बहुत जरूरी है। यही लक्ष्य हमारे लिए रास्ता  प्रदान कर देता है। 
 सुधा चौधरी (जैन )✍️
 कल फिर एक नए विचार के साथ
 धन्यवाद, नमस्कार🙏

Monday, 30 September 2024

पानी की तरह बहो ✍️l

पता नहीं पुरुषार्थ से भाग्य की रेखाएं बनती है या रेखाओं से भाग्य बनता है जो भी है पहली बात पर ज्यादा विश्वास करना चाहिए मेहनत के रास्ते हाथों में रेखाएं बनाते हुए निकलते हैं ---
 कभी पानी को रास्ता बनाते हुए देखिए, बिना शोर मचाए बिना किसी extra effort के शांति से रास्ता बना लेता है और साथ में कचरा भी बहा ले जाता है। पानी कभी किसी से कहता नहीं कि हटो- मेरा रास्ता छोड़ो।उसे अपने बूंदों की ताकत पर भरोसा है , सिर्फ जो मुझेआगे बढ़ाएंगी। कभी एक बार मां नर्मदा के उद्गम स्थान को देखिए एक पतली सी धारा अमरकंटक से शुरू होती है और चलते-चलते लगभग 1312 किलोमीटर तक विशाल रूप  लेती हुई रास्ते में मिलने वाले गांवों और शहरों को परिपोषित करती हुई  खंभात की खाड़ी तक जाती है। हाथों की रेखाओं के यह पतले पतले धागे जिनके ओर -छोर स्वतंत्र सिरो को लिए होते हैं यह एक संदेश देते हैं कि तुम्हें रेखाओं ने कभी बाधा नहीं डाली, तुम्हें इन रेखाओं ने बांधा नहीं है, तुम्हारी शक्तियां, तुम्हारी कार्य क्षमता, तुम्हारी सोच और तुम्हारी काबिलियत विस्तार को लिए हुए हैं ।
  चलिए रेखाओं 
 पर विश्वास भी कर लेते हैं कि इन रेखाओं के कारण मेरी तरक्की नहीं हो रही तो हर रेखा के अंत में एक गोल गड्ढा होना चाहिए था या उसके अंत में एक बड़ा क्रॉस बना होना चाहिए था जो यह बताता कि बस इससे आगे और, नहीं बढ़ा जा सकता पर ऐसा नहीं है, हर रेखा एक आजादी देती है, रास्ता देती है कि तुम आगे बढ़ो,पानी बनो और अपना रास्ता स्वयं बनाओ
 सुधा चौधरी(जैन )🙏
 धन्यवाद
कल फिर एक नए विचार के साथ🥰

Sunday, 29 September 2024

'जिजीविषा '

खुदकुशी के पल में लुट जाएगी दुनिया तेरी,सौ बार इस पर सोचो बदलेगी जिंदगी। तुम नहीं रहोगे किसी को फर्क ना पड़ेगा,  मां-बाप की तो सोचो, तड़पेगी जिंदगी।
 आत्महत्या की खबरें हमें कितना विचलित कर देती हैं। रोज सुनते हैं नंबर कम आने पर,exam में fail हो जाने पर, comptition  में select न होने पर या जीवन की समस्याओं से घबराकर किसी ने आत्महत्या कर ली! 
क्यों
लोग अपनी जान देने,  तैयार हो जाते हैं। क्या निराशा इतनी बड़ी हो जाती है कि आशा की कोई किरण दिखाई नहीं देती? उस समय यही सोचना होगा कि किसके जीवन में समस्या नहीं?यदि आत्महत्या समस्या का हल होता तो यह संसार लोगों से खाली हो चुका होता। सब के सब आत्महत्या से ही हल ढूंढ लेते लेकिन ऐसा होता नहीं सब जीवन से जूझते हैं, जूझना ही चाहिए क्योंकि जीवित रहेंगे तभी तो कुछ कर पाएंगे👍 मरकर तो कुछ हासिल नहीं होता 
एक छोटी सी चींटी तक संघर्षों से नहीं हारती. गाड़ी से कुचले हुए  पैर के साथ ,
 लंगड़ा हो जाने वाला कुत्ता भी सड़कों पर घूमता दिखाई दे जाता है।दुर्घटनाग्रस्त इंसान या जन्म से किसी गंभीर विकलांगता से पीड़ित लोग भी कितने ऊंचे पद और मुकाम पर पहुंच जाते हैं,यह सब को पता है। घबराकर जान देने की बातें वो करते हैं जिनका खुद पर से भरोसा उठ जाता है दुनिया में सबसे बड़ी कमजोरी है खुद पर से भरोसा उठ जाना इसी कमजोरी पर विजय प्राप्त कर आगे बढ़ना है।
 सुधा चौधरी (जैन) 
कल एक नए विचार के साथ 
 धन्यवाद🙏

Saturday, 28 September 2024

मुखौटा ✍️

जब हम मन में कुछ सोचते हैं लेकिन चेहरे के expression या भाव मन के विचारों को प्रकट नहीं होने देते कुछ और ही दिखाते हैं इसी का नाम मुखौटा है।वास्तव में यदि हम कुछ भी किसी के भी बारे में क्या सोच रहे हैं?अच्छा या बुरा उस भाव या विचार को चेहरे पर व्यक्त  नहीं होने देना यही तो मुखौटा है। मुखोटे अनेकों प्रकार के होते हैं जैसे, मां बच्चे को डांटते समय चेहरे को गुस्से से भर लेती है पर उसके अंतर में बच्चों के प्रति वात्सल्य ही रहता है,दूसरा हम किसी के प्रति बहुत अच्छे विचार नहीं रखते या उसे पसंद नहीं करते तब भी एक ऐसा face expression बना लेते हैं 'सुंदर,'की कोई मन के भावों को भांप नहीं सकता। लोक व्यवहार में यह ठीक हो सकता है किंतु आध्यात्म की दृष्टि से यह बिल्कुल ठीक नहीं, मित्रो रोज हम स्वयं का विश्लेषण करें तो रोजमर्रा के जीवन में मित्रों के सामने अलग,घर के नौकरों के सामनेअलग,रिश्तेदारों और परिवार जनों सामने अलग। यह अलग-अलग दिखाई देना, ही तो मुखोटे ओढ़ने जैसा है वास्तव में जैसे हम अंदर में है वैसे ही सरल और सहज बाहर में दिखे तभी हम इन मुखौटों से मुक्त हो सकते हैं। कभी-कभी इन मुखौटों को लगाए रखना जरूरी भी होता है,यदि मन के विचार शब्दों में और शब्दों का क्रियान्वयन शरीर से हो जाए तो यह संसार युद्ध का मैदान बन जाएगा। मन वचन और काय की एकरूपता का नाम ही मुखौटों से रहित जीवन है। 
सुधा चौधरी(जैन) 
कल फिर एक नए विचार के साथ धन्यवाद🙏✍️

Friday, 27 September 2024

उल्लास या उत्साह

उल्लास या उत्साह एक ऐसी भावना है जो आपको कभी थमने नहीं देती /थकने नहीं देती।किसी कार्य को शुरू करने की तीव्र इच्छा और उसके फल स्वरुप आने वाली मानसिक और शारीरिक सक्रियता। इसी को हम उत्साह कहते हैं। कार्य के समाप्त होने तक वही ऊर्जा बनी रहे इसी का नाम तो उत्साह है, जब इस प्रसन्नता में कोई भी प्रतिकूलता आए या किसी का भी असहयोग मिले, इन सब के बारे में जब हम रत्ती भर भी परेशान नहीं होते, कोई रुकावट--- रुकावट लगती ही नहीं या इस पर विजय प्राप्त करना आसान सा काम लगता है। हमारे अंदर का उत्साह कोई ना कोई हल निकल ही लेता है और हम लक्ष्य पर पहुंचकर ही दम लेते हैं।बच्चों से हम सही-सही अर्थों में उत्साह की परिभाषा सीख सकते हैं
 सुधा चौधरी( जैन )
कल फिर एक नए विचार के साथ आपके बीच,
🙏 धन्यवाद नमस्कार 

‘‘चुप रह गये’’

 ‘सर’ आप रिटायर हो रहे हैं। अब, आपकी काम करने की उम्र नहीं रही। बट नो टेंशन, सरकार बड़ी दयालु है आपको हर महीने पेंशन मिलती रहेगी।
 दस से पाँच तक की ड्यूटी, पांच से दस तक की ड्यूटी में बदल गई। पोते-पोतियों के संग खेलने की इच्छा बड़ी प्रबल थी, लेकिन जरा बच्चों को देखते रहना, खिलाते रहना, हुक्मों के नीचे दब-सी गई। वर्षो से हुक्म बजा लाने की आदत जो पड़ी है।
 सुबह जब ताजी हवा खाने जायें तो लौटते समय जरा दूध और ब्रेड लेते आईयेगा। ‘‘जरा क्यों? पूरी लायेंगे’’  ताजी हवा खाने बालों को गुस्सा पीना, अपने आप आ जाता है। हाँ आजकल आप सब्जी छांटते क्यों नही!सब्जी वाला बुड्ढा समझ कर आपको उल्लू बना देता है। वो तो सब्जी वाला है, तू तो मेरा वाला होकर भी मुझे उल्लू समझता है, पर तुझे उल्लू का पट्ठा नहीं कहूँगा’’
 खाना मेज पर रखा है, खा लीजियेगा, ‘‘मुझे आफिस के लिये देर हो रही है। खाऊँगा नहीं तो क्या करूँगा ?’’, उपवास थोड़े ही करूँगा ! बच्चों को स्टाॅप से ले भी आऊँगा। फोन और बिजली का बिल जमा कर दूंगा और पेंशन भी निकाल लाऊँगा’’। रिटायर्ड आदमी को या तो चुप रहना चाहिये या हाँ-हाँ करना चाहिये। क्योकि ज्यादा सुनने का तो किसी पर वक्त ही नही होता है। ऊर्जा बचती है अपना ही समय बचता है। दो काम अपनी तरफ से कर देंगे तो हर्ज ही क्या है?
 वाह ! बाबू जी, रिटायर हो गये पर बाबू ही बने रहोगे क्या? कलम घसीटने की आदत गई नही। फालतू में कागज गूदते रहते हो जे नहीं बच्चों का गृहकार्य करा दें। ‘‘कविता का घोर अपमान’’ किन्तु रिटायर्ड आदमी को गुस्सा तो आना ही नहीं चाहिये और चिल्लाने की ताकत होती नहीं, आराम करने की उम्र है, अनायास ही कविता पूरी हो गई और मन के कागज पर लिखा गई-

 सरकार दयालु है 
सचमुच सरकार बड़ी दयालु है ।
काम तो कोई और करवाता है,
किन्तु पेंशन सरकार देती है।।
 चलो बच्चो,गृहकार्य अधूरा है, हम पूरा करेंगे। दिन भर में पहली बार रिटायर्ड आदमी ने मुँह खोला।
सुधा चौधरी 

Thursday, 26 September 2024

अहंकार तो रावण का भी नहीं रहा

स्वाभिमान और अहंकार होते इंसानों को ही है, स्वाभिमान,आत्म सम्मान की सुंदर भावना से  ओत - प्रोत होता है जो कभी भी दूसरे को कमतर दिखाने की कोशिश नहीं करता, परंतु अहंकार यह जताने की कोशिश करता है की विशेष गुण या विशेष उपलब्धि के कारण मैं औरों से श्रेष्ठ हूं याद रखिए आपके बताने से आप श्रेष्ठ नहीं हो जाते।कस्तूरी को अपनी सुगंध फैलाने  कहीं नहीं जाना पड़ता सबको स्वतः ज्ञान में आ जाता है कि यह सुगंध हिरण की वजह से है। स्वाभिमान को सदैव बनाए रखना चाहिए क्योंकि मेरे स्वाभिमानी होने से कोई दूसरा नकारात्मक तरीके से प्रभावित नहीं होता किंतु अहंकारी या अभिमानी होने से जो 
'मैं 'का भाव मन में आता है वह हमें सामाजिकता से दूर कर देता है परिवर्तनशील जीवन में इस निकृष्ट या क्षुद्र अहंकार की,भावना को छोड़ देना चाहिए।🙏 नमस्कार,धन्यवाद
 सुधा चौधरी,
कल एक नए विचार के साथ पुनः आपके बीच🥰

Wednesday, 25 September 2024

ऐसी क्षमा,और कहां?

पूरे रामायण ग्रंथ का अवलोकन करने पर हम पाएंगे कि एक व्यक्ति  कैकई को छोड़कर सभी ने कितनी सहजता और खूबसूरती से क्षमा को धारण किया।
 पिता ने कहा 14 साल के लिए वन जाना है, सुबह राज तिलक होना था और आज यह आदेश, कोई तर्क नहीं। दशरथ ने कैकई को भी क्षमा कर दिया क्योंकि वन जाना मन में क्रोध लेकर या बिना क्षमा करे आसान/ संभव ही नहीं था। श्री राम का प्रश्न था, सहज में कब? मां सीता ने कौशल्या और सुमित्रा के साथ-साथ कैकई से भी कहा हम श्री राम के साथ जाएंगे यदि कैकई के प्रति जरा भी दुर्भाव होता तो वन जाते समय क्या तीनों माताओं के प्रति उनका एक जैसा भाव होता?शायद नहीं।सब क्षमा के भावों से भरे थे. लक्ष्मण ने कहा उर्मिला मैं भी साथ जा रहा हूं, कोई प्रतिकार नहीं, बैर भाव नहीं, गुस्सा नहीं अर्थात क्षमा ही क्षमा -
जाइये माता सीता और श्री राम को  आपकी बहुत जरूरत है। सीता को घनघोर जंगल में भेजा गया हिंसक पशुओं के बीच, नितांत अकेली पर कहा क्या?  सेनापति जाकर श्री राम से कहना, मुझे तो छोड़ दिया पर कभी धर्म को ना छोड़ दे, 🙏 श्री राम के प्रति करुणा, क्षमाऔर मैत्री। अग्नि में उतारा गया, कैसी परीक्षा ली गई?   सहर्ष तैयार तब भी श्री राम के प्रति कोई  राग द्वेष   नहीं। इससे ज्यादा क्षमा शायद ही हम कभी अपने जीवन में देख पायें या सुन पायें।यह थी रामायण। महाभारत में क्षमा ना कर पाने के कारण युद्ध, हिंसा और विनाश की लीला हुई। अंधे के पुत्र अंधे यह गलत भी नहीं था फिर भी सहन नहीं हुआ था। क्षमा ना कर पाने के कारण ही महाभारत हुई अपने जीवन में क्षमा को धारण कीजिए और जीवन को सुंदर दिशा दीजिए 🙏
धन्यवाद
सुधा चौधरी 
कल एक नए विचार के साथ फिर आपके साथ 🥰

Tuesday, 24 September 2024

कोई क्या कहेगा?

पहले हम आदतों को बनाते हैं फिर आदतें हमें बनाती हैँ ।आदत एक रस्सी की तरह होती है, हम प्रतिदिन उसमें एक बट देते हैं और आदत को मजबूत करते हैं।habit में से h हटा दें,abit रह जाएगा bit में से भी b हटा दे it रह जायेगा।बुरी आदतें हो या अच्छी हमारे परिचित, मित्र, रिश्तेदार, परिवारजन सब जानते हैं। एक बात सोचिए कोई क्या कहेगा? इस प्रश्न को अपने आप से  बार-बार पूछने से हम उस आदत से छुटकारा पा सकते हैं।
 मेरे,गुटखा से रंगे  दांतों को कोई देख ना ले एक बार भी यह  विचार मन में आ जाए या अपने दांतों को छुपाने के लिए ही तो  मैं मुंह बंद करके हंसता हूं 🥺या सामने वाला मेरे बारे में क्या सोच रहा होगा? सामने नहीं तो पीठ पीछे कुछ ना कुछ कहेगा, अवश्य। सिगरेट की डिब्बी पर बने कैंसर के पेशेंट के चित्र को बार-बार देखने से शायद कभी हमें उस सिगरेट से घृणा हो जाए, शराब ने किस तरह एक परिवार को बर्बाद किया है लत के अंजाम से इस तरह की बर्बादी को देखकर भी हम लत छोड़ने का प्रयास कर सकते हैं। गलत आदत को छोड़ते ही हमारे आत्मविश्वास के स्तर को एक ऊंचाई मिलती है। सुबह-सुबह जिस तरह हम अपने मुंह से आने वाली दुर्गंध से छुटकारा पाना चाहते हैं, उपाय करते हैं ठीक उसी प्रकार हमें बुरी आदतों से छुटकारा पाने का उपाय करना चाहिए👍 शुभ प्रभात मित्रों,
सुधा चौधरी🙏 कल फिर एक नए विचार के साथ, धन्यवाद

Monday, 23 September 2024

घड़ी चलती रहती है, मंजिल पर नहीं पहुंचती, पर हमें चलने की प्रेरणा देती है मंजिल पर पहुंचने के लिए👍

समय और अनुशासन को यदि परिभाषित करना हो तो हम कह सकते हैं कि एक निश्चित समय अवधि में काम का पूर्ण होना भी अनुशासन है। एक घंटा कभी 60 मिनट से ज्यादा का नहीं हो सकता,मिनट कभी 60 सेकंड से ज्यादा का नहीं हो सकता। तो क्यों ना हम समय से ही समय का मूल्य करना सीखें।जैसे सही समय पर होने वाली बारिश फसलों के लिए वरदान है उसी प्रकार हमारे जीवन में भी समय का प्रबंधन बहुत आवश्यक है कहते समय की साथ चलो, समय का मूल्य करो, सही समय पर सही कम करो।
 जो समय को बर्बाद कर देता है समय उसे बर्बाद कर देता है एक मिली सेकंड या माइक्रो सेकंड को बचाना भी एक आर्ट है, किसी धावक से उस दर्द को पूछिए जो एक सेकंड के हजारवे हिस्से में पीछे रहकर रेस हार जाता है या डॉक्टर के एक सेकेंड लेट हो जाने पर 
 मरीज की मृत्यु हो जाती है इसलिए समय अमूल्य है।पूरी संपदा को देकर भी एक पल  लौटाया नहीं जा सकता। कल सही समय पर पुनः एक नए विचार के साथ 
धन्यवाद🙏सुधा चौधरी (जैन )

Sunday, 22 September 2024

सफलता एक यात्रा है,,मंजिल नहीं

एक लक्ष्य फिर उसे प्राप्त करने का जुनून और सही दिशा में किए जाने वाला पुरुषार्थ लक्ष्य तक पहुंचा देता है।
 सफलता प्राप्त करने के लिए हमें अपना रास्ता स्वयं बनाना होता है, दूसरों ने जिस राह को अपनाया है -हो सकता है उसके लिए वह रास्ता ठीक हो पर अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए हमें,किस रास्ते पर चलना है, वह हमारी योग्यता,हमारा परिश्रम, हमारे संसाधनों की उपलब्धता और इन सबसे ऊपर --
बाधाओ से डर कर हिम्मत न हारने का जज्बा यही सब हमें सफलता की शत- प्रतिशत गारंटी देते हैं लक्ष्य प्राप्ति के बाद नया लक्ष्य बनाएं और पुनः एक नई यात्रा की शुरुआत करें।ठहर जाने का नाम जीवन नहीं। सांस भी ठहर जाए तो जीवन समाप्त हो जाता है, पानी ठहर जाए तो सड़ जाता है 
धन्यवाद 🙏अपनी राय जरूर प्रेषित करें🥰

Friday, 20 September 2024

"घर /मकान"

तुमने मकाँ,बनाया था हमने घर बना दिया, दरवाजा सूना-सूना था तोरण सजा दिया।
 तुमने रखा था चित्र मां का,  उदास कोने में, हमने दिया जला के मंदिर बना दिया।
 घर टूट जाएगा,आया यह मौका भी कई बार, खुद टूट गई "सुधा "पर घर को बचा लिया।
 चिड़िया की तरह एक दिन उड़ जायेंगे छोड़कर, जिंदगी से शिकायतों को गले से लगा लिया।
 अपनी हजार खामियां हम देख ना सके,
 तुम्हारी जरा सी बात का बतंगड़ बना दिया।
 क्या मिल गया दुख के दिल को तुम्हारे? बस आज से शब्दों को मरहम बना लिया लिया।🥰