तुमने रखा था चित्र मां का, उदास कोने में, हमने दिया जला के मंदिर बना दिया।
घर टूट जाएगा,आया यह मौका भी कई बार, खुद टूट गई "सुधा "पर घर को बचा लिया।
चिड़िया की तरह एक दिन उड़ जायेंगे छोड़कर, जिंदगी से शिकायतों को गले से लगा लिया।
अपनी हजार खामियां हम देख ना सके,
तुम्हारी जरा सी बात का बतंगड़ बना दिया।
क्या मिल गया दुख के दिल को तुम्हारे? बस आज से शब्दों को मरहम बना लिया लिया।🥰
इसे पढकर मुझे सच में मेरी सासूमां की याद आ गई
ReplyDeleteवह अभी हमारे बीच नहीं है
But उनकी याद बहुत सताती है ।