स्वाभिमान और अहंकार होते इंसानों को ही है, स्वाभिमान,आत्म सम्मान की सुंदर भावना से ओत - प्रोत होता है जो कभी भी दूसरे को कमतर दिखाने की कोशिश नहीं करता, परंतु अहंकार यह जताने की कोशिश करता है की विशेष गुण या विशेष उपलब्धि के कारण मैं औरों से श्रेष्ठ हूं याद रखिए आपके बताने से आप श्रेष्ठ नहीं हो जाते।कस्तूरी को अपनी सुगंध फैलाने कहीं नहीं जाना पड़ता सबको स्वतः ज्ञान में आ जाता है कि यह सुगंध हिरण की वजह से है। स्वाभिमान को सदैव बनाए रखना चाहिए क्योंकि मेरे स्वाभिमानी होने से कोई दूसरा नकारात्मक तरीके से प्रभावित नहीं होता किंतु अहंकारी या अभिमानी होने से जो
'मैं 'का भाव मन में आता है वह हमें सामाजिकता से दूर कर देता है परिवर्तनशील जीवन में इस निकृष्ट या क्षुद्र अहंकार की,भावना को छोड़ देना चाहिए।🙏 नमस्कार,धन्यवाद
सुधा चौधरी,
कल एक नए विचार के साथ पुनः आपके बीच🥰
* सच में अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन है ।।
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