समय और अनुशासन को यदि परिभाषित करना हो तो हम कह सकते हैं कि एक निश्चित समय अवधि में काम का पूर्ण होना भी अनुशासन है। एक घंटा कभी 60 मिनट से ज्यादा का नहीं हो सकता,मिनट कभी 60 सेकंड से ज्यादा का नहीं हो सकता। तो क्यों ना हम समय से ही समय का मूल्य करना सीखें।जैसे सही समय पर होने वाली बारिश फसलों के लिए वरदान है उसी प्रकार हमारे जीवन में भी समय का प्रबंधन बहुत आवश्यक है कहते समय की साथ चलो, समय का मूल्य करो, सही समय पर सही कम करो।
जो समय को बर्बाद कर देता है समय उसे बर्बाद कर देता है एक मिली सेकंड या माइक्रो सेकंड को बचाना भी एक आर्ट है, किसी धावक से उस दर्द को पूछिए जो एक सेकंड के हजारवे हिस्से में पीछे रहकर रेस हार जाता है या डॉक्टर के एक सेकेंड लेट हो जाने पर
मरीज की मृत्यु हो जाती है इसलिए समय अमूल्य है।पूरी संपदा को देकर भी एक पल लौटाया नहीं जा सकता। कल सही समय पर पुनः एक नए विचार के साथ
धन्यवाद🙏सुधा चौधरी (जैन )
बिल्कुल सही बात है
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