उल्लास या उत्साह एक ऐसी भावना है जो आपको कभी थमने नहीं देती /थकने नहीं देती।किसी कार्य को शुरू करने की तीव्र इच्छा और उसके फल स्वरुप आने वाली मानसिक और शारीरिक सक्रियता। इसी को हम उत्साह कहते हैं। कार्य के समाप्त होने तक वही ऊर्जा बनी रहे इसी का नाम तो उत्साह है, जब इस प्रसन्नता में कोई भी प्रतिकूलता आए या किसी का भी असहयोग मिले, इन सब के बारे में जब हम रत्ती भर भी परेशान नहीं होते, कोई रुकावट--- रुकावट लगती ही नहीं या इस पर विजय प्राप्त करना आसान सा काम लगता है। हमारे अंदर का उत्साह कोई ना कोई हल निकल ही लेता है और हम लक्ष्य पर पहुंचकर ही दम लेते हैं।बच्चों से हम सही-सही अर्थों में उत्साह की परिभाषा सीख सकते हैं
सुधा चौधरी( जैन )
कल फिर एक नए विचार के साथ आपके बीच,
🙏 धन्यवाद नमस्कार
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