Friday, 20 September 2024

"घर /मकान"

तुमने मकाँ,बनाया था हमने घर बना दिया, दरवाजा सूना-सूना था तोरण सजा दिया।
 तुमने रखा था चित्र मां का,  उदास कोने में, हमने दिया जला के मंदिर बना दिया।
 घर टूट जाएगा,आया यह मौका भी कई बार, खुद टूट गई "सुधा "पर घर को बचा लिया।
 चिड़िया की तरह एक दिन उड़ जायेंगे छोड़कर, जिंदगी से शिकायतों को गले से लगा लिया।
 अपनी हजार खामियां हम देख ना सके,
 तुम्हारी जरा सी बात का बतंगड़ बना दिया।
 क्या मिल गया दुख के दिल को तुम्हारे? बस आज से शब्दों को मरहम बना लिया लिया।🥰

1 comment:

  1. इसे पढकर मुझे सच में मेरी सासूमां की याद आ गई
    वह अभी हमारे बीच नहीं है
    But उनकी याद बहुत सताती है ।

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