Thursday, 26 September 2024

अहंकार तो रावण का भी नहीं रहा

स्वाभिमान और अहंकार होते इंसानों को ही है, स्वाभिमान,आत्म सम्मान की सुंदर भावना से  ओत - प्रोत होता है जो कभी भी दूसरे को कमतर दिखाने की कोशिश नहीं करता, परंतु अहंकार यह जताने की कोशिश करता है की विशेष गुण या विशेष उपलब्धि के कारण मैं औरों से श्रेष्ठ हूं याद रखिए आपके बताने से आप श्रेष्ठ नहीं हो जाते।कस्तूरी को अपनी सुगंध फैलाने  कहीं नहीं जाना पड़ता सबको स्वतः ज्ञान में आ जाता है कि यह सुगंध हिरण की वजह से है। स्वाभिमान को सदैव बनाए रखना चाहिए क्योंकि मेरे स्वाभिमानी होने से कोई दूसरा नकारात्मक तरीके से प्रभावित नहीं होता किंतु अहंकारी या अभिमानी होने से जो 
'मैं 'का भाव मन में आता है वह हमें सामाजिकता से दूर कर देता है परिवर्तनशील जीवन में इस निकृष्ट या क्षुद्र अहंकार की,भावना को छोड़ देना चाहिए।🙏 नमस्कार,धन्यवाद
 सुधा चौधरी,
कल एक नए विचार के साथ पुनः आपके बीच🥰

Wednesday, 25 September 2024

ऐसी क्षमा,और कहां?

पूरे रामायण ग्रंथ का अवलोकन करने पर हम पाएंगे कि एक व्यक्ति  कैकई को छोड़कर सभी ने कितनी सहजता और खूबसूरती से क्षमा को धारण किया।
 पिता ने कहा 14 साल के लिए वन जाना है, सुबह राज तिलक होना था और आज यह आदेश, कोई तर्क नहीं। दशरथ ने कैकई को भी क्षमा कर दिया क्योंकि वन जाना मन में क्रोध लेकर या बिना क्षमा करे आसान/ संभव ही नहीं था। श्री राम का प्रश्न था, सहज में कब? मां सीता ने कौशल्या और सुमित्रा के साथ-साथ कैकई से भी कहा हम श्री राम के साथ जाएंगे यदि कैकई के प्रति जरा भी दुर्भाव होता तो वन जाते समय क्या तीनों माताओं के प्रति उनका एक जैसा भाव होता?शायद नहीं।सब क्षमा के भावों से भरे थे. लक्ष्मण ने कहा उर्मिला मैं भी साथ जा रहा हूं, कोई प्रतिकार नहीं, बैर भाव नहीं, गुस्सा नहीं अर्थात क्षमा ही क्षमा -
जाइये माता सीता और श्री राम को  आपकी बहुत जरूरत है। सीता को घनघोर जंगल में भेजा गया हिंसक पशुओं के बीच, नितांत अकेली पर कहा क्या?  सेनापति जाकर श्री राम से कहना, मुझे तो छोड़ दिया पर कभी धर्म को ना छोड़ दे, 🙏 श्री राम के प्रति करुणा, क्षमाऔर मैत्री। अग्नि में उतारा गया, कैसी परीक्षा ली गई?   सहर्ष तैयार तब भी श्री राम के प्रति कोई  राग द्वेष   नहीं। इससे ज्यादा क्षमा शायद ही हम कभी अपने जीवन में देख पायें या सुन पायें।यह थी रामायण। महाभारत में क्षमा ना कर पाने के कारण युद्ध, हिंसा और विनाश की लीला हुई। अंधे के पुत्र अंधे यह गलत भी नहीं था फिर भी सहन नहीं हुआ था। क्षमा ना कर पाने के कारण ही महाभारत हुई अपने जीवन में क्षमा को धारण कीजिए और जीवन को सुंदर दिशा दीजिए 🙏
धन्यवाद
सुधा चौधरी 
कल एक नए विचार के साथ फिर आपके साथ 🥰

Tuesday, 24 September 2024

कोई क्या कहेगा?

पहले हम आदतों को बनाते हैं फिर आदतें हमें बनाती हैँ ।आदत एक रस्सी की तरह होती है, हम प्रतिदिन उसमें एक बट देते हैं और आदत को मजबूत करते हैं।habit में से h हटा दें,abit रह जाएगा bit में से भी b हटा दे it रह जायेगा।बुरी आदतें हो या अच्छी हमारे परिचित, मित्र, रिश्तेदार, परिवारजन सब जानते हैं। एक बात सोचिए कोई क्या कहेगा? इस प्रश्न को अपने आप से  बार-बार पूछने से हम उस आदत से छुटकारा पा सकते हैं।
 मेरे,गुटखा से रंगे  दांतों को कोई देख ना ले एक बार भी यह  विचार मन में आ जाए या अपने दांतों को छुपाने के लिए ही तो  मैं मुंह बंद करके हंसता हूं 🥺या सामने वाला मेरे बारे में क्या सोच रहा होगा? सामने नहीं तो पीठ पीछे कुछ ना कुछ कहेगा, अवश्य। सिगरेट की डिब्बी पर बने कैंसर के पेशेंट के चित्र को बार-बार देखने से शायद कभी हमें उस सिगरेट से घृणा हो जाए, शराब ने किस तरह एक परिवार को बर्बाद किया है लत के अंजाम से इस तरह की बर्बादी को देखकर भी हम लत छोड़ने का प्रयास कर सकते हैं। गलत आदत को छोड़ते ही हमारे आत्मविश्वास के स्तर को एक ऊंचाई मिलती है। सुबह-सुबह जिस तरह हम अपने मुंह से आने वाली दुर्गंध से छुटकारा पाना चाहते हैं, उपाय करते हैं ठीक उसी प्रकार हमें बुरी आदतों से छुटकारा पाने का उपाय करना चाहिए👍 शुभ प्रभात मित्रों,
सुधा चौधरी🙏 कल फिर एक नए विचार के साथ, धन्यवाद

Monday, 23 September 2024

घड़ी चलती रहती है, मंजिल पर नहीं पहुंचती, पर हमें चलने की प्रेरणा देती है मंजिल पर पहुंचने के लिए👍

समय और अनुशासन को यदि परिभाषित करना हो तो हम कह सकते हैं कि एक निश्चित समय अवधि में काम का पूर्ण होना भी अनुशासन है। एक घंटा कभी 60 मिनट से ज्यादा का नहीं हो सकता,मिनट कभी 60 सेकंड से ज्यादा का नहीं हो सकता। तो क्यों ना हम समय से ही समय का मूल्य करना सीखें।जैसे सही समय पर होने वाली बारिश फसलों के लिए वरदान है उसी प्रकार हमारे जीवन में भी समय का प्रबंधन बहुत आवश्यक है कहते समय की साथ चलो, समय का मूल्य करो, सही समय पर सही कम करो।
 जो समय को बर्बाद कर देता है समय उसे बर्बाद कर देता है एक मिली सेकंड या माइक्रो सेकंड को बचाना भी एक आर्ट है, किसी धावक से उस दर्द को पूछिए जो एक सेकंड के हजारवे हिस्से में पीछे रहकर रेस हार जाता है या डॉक्टर के एक सेकेंड लेट हो जाने पर 
 मरीज की मृत्यु हो जाती है इसलिए समय अमूल्य है।पूरी संपदा को देकर भी एक पल  लौटाया नहीं जा सकता। कल सही समय पर पुनः एक नए विचार के साथ 
धन्यवाद🙏सुधा चौधरी (जैन )

Sunday, 22 September 2024

सफलता एक यात्रा है,,मंजिल नहीं

एक लक्ष्य फिर उसे प्राप्त करने का जुनून और सही दिशा में किए जाने वाला पुरुषार्थ लक्ष्य तक पहुंचा देता है।
 सफलता प्राप्त करने के लिए हमें अपना रास्ता स्वयं बनाना होता है, दूसरों ने जिस राह को अपनाया है -हो सकता है उसके लिए वह रास्ता ठीक हो पर अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए हमें,किस रास्ते पर चलना है, वह हमारी योग्यता,हमारा परिश्रम, हमारे संसाधनों की उपलब्धता और इन सबसे ऊपर --
बाधाओ से डर कर हिम्मत न हारने का जज्बा यही सब हमें सफलता की शत- प्रतिशत गारंटी देते हैं लक्ष्य प्राप्ति के बाद नया लक्ष्य बनाएं और पुनः एक नई यात्रा की शुरुआत करें।ठहर जाने का नाम जीवन नहीं। सांस भी ठहर जाए तो जीवन समाप्त हो जाता है, पानी ठहर जाए तो सड़ जाता है 
धन्यवाद 🙏अपनी राय जरूर प्रेषित करें🥰

Friday, 20 September 2024

"घर /मकान"

तुमने मकाँ,बनाया था हमने घर बना दिया, दरवाजा सूना-सूना था तोरण सजा दिया।
 तुमने रखा था चित्र मां का,  उदास कोने में, हमने दिया जला के मंदिर बना दिया।
 घर टूट जाएगा,आया यह मौका भी कई बार, खुद टूट गई "सुधा "पर घर को बचा लिया।
 चिड़िया की तरह एक दिन उड़ जायेंगे छोड़कर, जिंदगी से शिकायतों को गले से लगा लिया।
 अपनी हजार खामियां हम देख ना सके,
 तुम्हारी जरा सी बात का बतंगड़ बना दिया।
 क्या मिल गया दुख के दिल को तुम्हारे? बस आज से शब्दों को मरहम बना लिया लिया।🥰